Suwasara में मतदाता ही बन रहे Hardeep singh dang के लिए मुश्किल, कैसे मिलेगी जीत?

सुवासरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे बीजेपी प्रत्याशी हरदीप सिंह डंग लगातार दो चुनाव इस सीट से जीत चुके हैं. 2018 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट से जीतने के बाद डंग ने ये कह कर पार्टी छोड़ दी कि कमलनाथ सरकार में उनकी कोई सुनवाई नहीं है. शायद उन्हें लगा होगा कि बेहद आसानी से जीत की हैट्रिक लगा देंगे. पर पार्टी बदलने से लेकर उपचुनाव के बीच जो लंबा अंतराल आया है उसमें बाजी पलटती सी दिखाई देती है. जो जनता दो बार डंग को सिर आंखों पर बिठा चुकी है वही अब अक्सर दुत्कारती नजर आती है. हालांकि इसे कांग्रेस के शगूफे भी करार दिया जाता है. हकीकत क्या है इसका खुलासा दस नवंबर होगा. उससे पहले तीन नवंबर को डंग और उनको चुनौती देने वाले बीजेपी प्रत्याशी राकेश पाटिदार की किस्मत वोटिंग मशीनों में कैद हो जाएगी. वैसे राकेश पाटीदार से भी पहले सुवासरा सीट पर पाटीदार समाज से आया प्रत्याशी जीत दर्ज करवाता रहा है. साल 2008 में यहां से राधेश्याम पाटीदार ने जीत दर्ज की थी. 1990, 1993 और 2003 में यहां से जगदीश देवड़ा जीत दर्ज करते रहे. वैसे तो सुवासरा सीट पर कोई खास जातिगत समीकरण नहीं रहे. पर जब से ये सीट आरक्षित से बदलकर सामान्य हुई तब से धीरे धीरे यहां जातिगत समीकरण उभरने लगे हैं. यहां सवर्णों के मत 70 फीसदी तो हरिजन 30 फीसदी हैं. इनके अलावा राजपूत 45 फीसदी और पाटीदार वोटर 15 से बीस फीसदी हैं. डंग की मुश्किल ये है कि वो सिख समाज से आते हैं जिनकी गिनती यहां बहुत कम है. ऐसे में दलबदलुओं वाले नारे के बीच जीत दर्ज करना डंग के लिए बड़ी मुश्किल साबित हो सकती है. बात करें वोटर्स की तो कुल वोटर्स 2 लाख 56 हजार हैं. पुरूष वोटर 1 लाख 31 हजार हैं महिला वोटर्स की संख्या 1 लाख 24 हजार है और ट्रांसजेंडर पांच हैं.

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