बस्तर के बीजेपी नेता भीमा मंडावी की हत्या नक्सलियों ने कर दी लेकिन दो दिन बाद ही भीमा मंडावी की पत्नी ओजस्वी मंडावी नक्सलियों को करारा जवाब देने के लिए परिवार सहित निकलीं और मतदान किया। लोकतंत्र को जीवित रखने के लिए ओजस्वी के पति ने शहादत दी और लोकतंत्र में मतदान कितना महत्वपूर्ण है, इस बात को समझते हुए ओजस्वी सड़कों पर लिखे नक्सलियों के मतदान बहिष्कार के नारों को रौंदती हुईं वोट करने पहुंची। पति की मौत और नक्सलियों की तमाम धमकियों के बावजूद उनके हौंसले नहीं डिगे। ओजस्वी के साथ ही भीमा मंडावी के बूढ़े माता-पिता, और परिवार के अन्य 6 सदस्य वोट डालने के लिए कतार में लगे रहे।
ओजस्वी ने कहा, कि मेरे परिवार का प्रत्येक सदस्य अपना वोट डालने बूथ तक आया है। भीमा मंडावी को यही सच्ची श्रद्धांजलि है। मैं उनके अधूरे कामों को पूरा करूंगी।’
ओजस्वी बूथ पर लाइन में लगी हुई थीं, लेकिन आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे। यह देखकर बूथ पर मौजूद कई अन्य लोगों की आंखें भी नम थीं। नक्सलियों को शायद यही सबसे तगड़ा जवाब था कि बुलेट का जवाब बैलट से दिया जाए और ओजस्वी मंडावी ने वोट डालकर न केवल नक्सलियों के मंसूबों पर पानी फेरा बल्कि अपने पति को सच्ची श्रद्धांजलि भी दी। ऐसी साहसी महिला को हमारा सलाम।