मध्यप्रदेश में कांग्रेस पार्टी में हमेशा से ही तीन गुट माने जाते हैं। हालांकि चुनाव जीतकर सत्ता में आने के बाद प्रदेश में गुटबाजी से इनकार किया जाता रहा और सीएम कमलनाथ ने भी बाकी के दो गुटों को साधने की कोशिश की या कहें कि अपने रणनीतिक दांव पेंचों से इन दो गुटों को दबाने की कोशिश की लेकिन अब ये दो गुट फिर से सक्रिय हो गए हैं और कमलनाथ गुट के लिए चिंता का सबब बन रहे हैं। ये दो गुट हैं सिंधिया गुट और दिग्विजय गुट। लगातार इन दोनों गुटों के नेता और कार्यकर्ता कमलनाथ सरकार के खिलाफ बयानबाजी करके मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। मंगलवार को दिग्विजय गुट की बैठक के बाद अब ये सवाल उठने लगा है कि क्या प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए दिग्गी राजा का गुट भी दावेदार बन गया है और इसीलिए लामबंदी की जा रही है। मंगलवार को पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के बंगले पर दिग्विजय सिंह और डॉ. गोविंद सिंह की मुलाकात के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि पीसीसी चीफ के चुनाव के समय कमलनाथ पर दबाव बनाने के लिए ये बैठक की गई है और अजय सिंह या दिग्विजय सिंह पीसीसी चीफ के लिए दावेदार हो सकते हैं।