#sharjeelimam ने इसलिए छोड़ी #MNC की नौकरी, जानिए पांच वक्त के नमाजी का सच

साल 2006 में एक युवक आईआईटी मुम्बई में एडमिशन लेता है. एक अच्छे भविष्य की इबारत गढ़ती आंखें, बड़ी बड़ी कंपनीज में अच्छे ओहदे पर काम करने की हजारों हसरतें. इन हसरतों के साथ कंप्यूटर साइँस डिपार्टमेंट में वो युवक एडमिशन लेता है. लेकिन जब अपने साथियों के बीच पहुंचता है तो ये पता चलता है कि देश के मुसलमानों को लेकर तरह तरह की बातें हैं. कितनी सही है कितनी गलत कोई नहीं जानता पर बातें हैं तो है. 200 अंडरग्रेजुएट्स के बीच में एक अकले मुसलमान लड़का. यही मुसलमान लड़का शारजील इमाम है. कुछ साल पहले शारजील ने खुद एक न्यूज चैनल को अपने बारे में ये बातें बताईं. आईआईटी में पढ़ाई के दौरान शारजील की नौकरी एक यूरोपीय कंपनी में लग गई. मोटी पगार, ऊंचा ओहदा, वो रुतबा जो शारजील हमेशा से अपने लिए चाहता था. लेकिन एक दिन ये सब कुछ छोड़ कर शारजील जेएनयू में एडमिशन लेता है. पीएचडी करने के लिए. वो पुरानी बातें जो आईआईटी में वो सुनता रहा. उसकी छाप शायद दिमाग से मिटी नहीं थी. यहां पढ़ाई की जगह शारजील इम्लामिक इल्मों की तरफ बढ़ता चला गया. पांच वक्त का नमाजी बन गया. अपने धर्म के बुलंदी पर ले जाने के लिए शरजील भड़काऊ भाषण देने लगा. ये उन्हीं भाषणों की झलक है जिनकी वजह से एक होनहार इंजीनियर अब सलाखों के पीछे है. मजहबी महत्वकाक्षाएं इतनी ऊंची हुईं कि सही गलत बयानों का फर्क ही भूल गया. और अब जो अंजाम है वो सबके सामने है. क्योंकि भारत को तोड़ना इतना आसान नहीं है.

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