काश! की ये सब भी कुशवाहा परिवार की तरह जहरीली गैस को हरा पाते..

ये दो तस्वीरें हैं लेकिन इनमें मौजूद शख्स एक ही है. तस्वीर के अंदर जो तस्वीर है उसमें खूबसूरत सी दिखने वाली मोहतरमा हैं गजाला परवीन. साल 1984 को ईद के मौके पर उनकी ये तस्वीर खींची गई. चेहरे पर खूबसूरती, खुशी दोनों है. नई जिंदगी के सपने हैं. अमूमन कुछ ही दिन बाद शायद गजाला का निकाह भी हो जाता. लेकिन जहरीली गैस ने सब कुछ तबाह कर दिया. उस साल 2 और 3 दिसंबर की दरमियानी रात जब जहरीली गैस ने रिसना शुरू किया तब शायद गजाला आधी रात के सपने बुन रही होंगी. क्या पता था कि आंखों में सिर्फ सपने ही रह जाएंगे और कुछ दिखाई न देगा. जहरीली गैस ने गजाला के चेहरे की चमक छीन ली, खूबसूरती छीन ली. जिन आंखों में सुनहरे कल के सपने थे वो आंखें, वो सपने वो खुशी वो परिवार सब कुछ छिन लिया. गैस त्रासदी का असर गजाला के चेहरे पर साफ नजर आता है. यही तस्वीर काफी है उस वक्त गैस त्रासदी के हालात बयां करने के लिए. जब एक चेहरा इतना बदल सकता है तो सोचिए पूरे शहर का क्या हाल हुआ होगा.

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