जानिए, कैसे प्रारंभ हुई श्राद्ध पूजा की परंपरा

गणेश विसर्जन के बाद 13 सितंबर से पितृ पक्ष प्रारंभ होगा और 28 सितंबर 2019 तक रहेगा. इन दिनों में पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध पूजा का विधान हैं. मान्यता अनुसार इन दिनों में श्रद्धा पूजा का विशेष फल मिलता है. श्रद्धा पूजा से पितृ खुश होते हैं और अपने परिवार के सदस्यों को आशीर्वाद देते हैं.

श्राद्ध पूजा करने से पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है. आज हम आपको बताएंगे कि श्राद्ध पूजा सबसे पहले किसने और कब की? हिन्दू धार्मिक ग्रंथ महाभारत में श्रद्धा पूजा का उल्लेख भीष्म पितामह ने किया है, उन्होंने युद्धिष्ठर को श्राद्ध के संबंध में कई तरह की बातें बताई थी.

महाभारत के अनुसार, महर्षि निमि ने पितरों की आत्म शांति और पितृ ऋणों से मुक्ति का मार्ग महातप्सवी अत्रि से पूछा था तब उन्होंने महर्षि निमि को श्राद्ध पूजा के बारे में बताया. तत्पश्चात महर्षि निमि ने श्रद्धा पूजा प्रारंभ की और उनकी श्राद्ध पूजा से पितृ खुश होने लगे और उन्हें पितृ ऋण से मुक्ति मिल गई.

महर्षि ने श्राद्ध पूजा के बारें में ऋषि मुनियों को ज्ञान दिया उन्होंने विस्तृत बताया कि किस तरह श्राद्ध पूजा से पितृ ऋण और दोषो से मुक्ति मिलती हैं. इसी तरह यह परंपरा आगे बढ़ने लगी और पितृ आत्माओं की शांति के लिए श्रद्धा पूजा होने लगी.

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