
Pitru paksh: आज से शुरू हो रहे श्राद्ध पक्ष
पितृ पक्ष के दौरान दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है. मान्यता है कि अगर पितर नाराज हो जाएं तो व्यक्ति का जीवन भी खुशहाल नहीं रहता और उसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे में पितरों को तृप्त करना और उनकी आत्मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में श्राद्ध करना जरूरी माना जाता है. श्राद्ध के जरिए पितरों की तृप्ति के लिए भोजन पहुंचाया जाता है और पिंड दान व तर्पण कर उनकी आत्मा की शांति की कामना की जाती है.
पितृ पक्ष का महत्व
हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है. हिन्दू धर्म को मानने वाले लोगों में मृत्यु के बाद मृत व्यक्ति का श्राद्ध करना बेहद जरूरी होता है. मान्यता है कि अगर श्राद्ध न किया जाए तो मरने वाले व्यक्ति की आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती है. वहीं कहा जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान पितरों का श्राद्ध करने से वे प्रसन्न होते हैं और उनकी आत्मा को शांति मिलती है. मान्यता है कि पितृ पक्ष में यमराज पितरों को अपने परिजनों से मिलने के लिए मुक्त कर देते हैं. इस दौरान अगर पितरों का श्राद्ध न किया जाए तो उनकी आत्मा दुखी हो जाती है.
तिथि से जुड़े नियम-
1. पिता का श्राद्ध अष्टमी के दिन और माता का नवमी के दिन किया जाता है.
2. जिन परिजनों की अकाल मृत्यु हुई है (किसी दुर्घटना या आत्महत्या के कारण), उनका श्राद्ध चतुर्दशी को करते हैं.
3. जिन पितृों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है, उनका श्राद्ध अमावस्या को करत हैं। इस तिथि को सर्व पितृ श्राद्ध कहा जाता है.
4. साधु-संन्यासियों का श्राद्ध द्वाद्वशी के दिन होता है.







