लाल बाग के राजा का बड़ा फैसला. इस साल नहीं दिखेगी गणेश उत्सव की रौनक

कोरोना काल में हर जलसे और धार्मिक आयोजन पर डर का साया है. कुछ दिन पहले जगन्नाथ यात्रा निकली. बरसों से निकाली जा रही इस यात्रा में भी कोरोना के मद्देनजर कई इंतजाम किए गए. ताकि सोशल डिस्टेंसिंग के साथ यात्रा निकाली जा सके. इसके बाद अब बारी महाकाल की सवारी की है. जिसमें काफी भारी मात्रा में बदलाव किए गए हैं. भक्तों को इस यात्रा में शामिल नहीं किया जाएगा. ताकि कम से कम लोगों के साथ यात्रा संपन्न हो सके. इस बीच मुम्बई में हर साल गणेश उत्सव के दौरान विराजने वाले लाल बाग के राजा ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है. वैसे तो लाल बागचा राजा हर साल अपनी नई ऊंचाइयों के साथ नया रिकॉर्ड बनाता है. जिसमें दस दिन के अंदर लाखों भक्त दर्शन करने पहुंचते हैं. पांडाल में लगने वाली भारी भीड़ के बावजूद बड़े बड़े सितारे लाल बाग के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. पर इस बार लाल बाग के राजा की रौनक नहीं दिखाई देगी. कोरोना काल में लाल बाग का राजा बिठाने वाले आयोजकों ने ऐसा फैसला लिया है जो सबको चौंका रहा है. कोरोना के चलते मुम्बई में सभी गणेश उत्सव आयोजित करने वालों से झांकी में कुछ कम करने की अपील की गई थी. ताकि भक्तों की भीड़ न उमड़े. ऐसे समय में लाल बाग का राजा बिठाने वाली सार्वजनिक गणेश उत्सव मंडल ने ऐसा फैसला लिया कि सब चौंक गए. मंडल ने फैसला लिया है कि इस साल लाल बाग के राजा विराजेंगे ही नहीं. लेकिन भक्तों को पांडाल सूना न लगे इसलिए पूरे दस दिन तक पांडाल में रक्तदान के शिविर लगेंगे. 1934 से लगातार गणेश उत्सव पर लाल बाग के राजा की मूर्ति सजती है. 87 साल में ये पहला मौका होगा जब गणेश उत्सव बिना लाल बाग के राजा के मनेगा. इसके पीछे आयोजकों का सिर्फ इतना उद्देश्य है कि लोग गणेश उत्सव पर भी भीड़ से दूर रहें और कोरोना से बच सकें. हर साल सबसे बड़ी मूर्ति का रिकॉर्ड बनाने वाले लाल बाग चा राजा ने इस साल ये फैसला लेकर एक और अनूठी मिसाल पेश की है.
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